एक दिन इस रूह का लिबास बदलना होगा
मुश्किल है मगर इस जिस्म से बाहर निकालना होगा
Sudhir Sirohi
सुधीर सिरोही
रोशनी सिमट गई अंधेरों की गिरफ्त में
जुगनुओं की उम्मीद पर शहर जिंदा है।
Sudhir Sirohi
सुधीर सिरोही
कभी चेहरे पर शिकन नहीं देखी उसके
जनाब रोने का हुनर सबको नहीं आता
Sudhir Sirohi
सुधीर सिरोही
ज़िन्दगी हर रात सिराहने कुछ फ़र्ज़ रख देती है
मै सुबह निकल पड़ता हूं जिन्हें मुकम्मल करने
Sudhir Sirohi
सुधीर सिरोही
हर मोड़ पर बदल रहा था, वो किस्मत मेरी
इस तरह आजमा रहा था, वो हिम्मत मेरी
Sudhir Sirohi
सुधीर सिरोही
-लेखक
सामने आए तो लोग दुख जताते बहुत है।
मगर पर्दो के पीछे मुस्कराते बहुत है|
Sudhir Sirohi
सुधीर सिरोही
-लेखक
Sudhir Sirohi
Sudhir Sirohi
Sudhir Sirohi